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प्रदेश में SFI का गठन कैसे किन परिस्थितियों में हुआ:
  1. हिमाचल प्रदेश में SFI का गठन सबसे पहले विश्वविद्यालय में 1976-77 में हुआ। विश्वविद्यालय में आपातकालीन समय में कुछ वामपंथी विचारधारा के लोगों ने विश्वविद्यालय में कुछ छात्रों के साथ संपर्क में आये तथा विश्वविद्यालय कर्मचारियों व अध्यापकों के साथ भी संपर्क किया। आपातकाल के समय तानाशाही के खिलाफ बढ़ती चेतना के कारण विश्वविद्यालय कांग्रेस पार्टी के खिलाफ महौल था। यह छात्रों, कर्मचारियों व अध्यापकों के प्रगतिशील तवके में था इसी के कारण आपातकाल के खत्म होने के तुरन्त बाद विश्वविद्यालय में SFI का गठन हुआ कामरेड मोहर सिंह ने छात्रों में SFI का गठन शुरू किया तथा विश्वविद्यालय में SFI संगठन बनाना शुरू किया।

  2. SFI कैसे छोटे से समय में प्रदेश का सबसे लोकप्रिय संगठन बनाकर उभरा ?
    हिमाचल प्रदेश में SFI का गठन सबसे पहले हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हुआ। विश्वविद्यालय में SFI ने छात्रों की रोजमरा की समस्याओं को हल करने के लिए छात्रों को संगठित करके संघर्ष शुरू किये। इससे छात्रों के अन्दर संगठन व संघर्ष चेतना का विकास हुआ साथ में जनवादी चेतना का प्रचार प्रसार हुआ समस्याओं के साथ विश्वविद्यालय कैम्पस में गैर जनवादी प्रवृतियों जैसे क्षेत्रवाद, सम्प्रदायिकता, गुडांगर्दी व रैंगिग, लड़कियों को छेड़ना इत्यादि के खिलाफ भी अभियान चलाया व छात्रों को शिक्षित किया गया।
    विश्वविद्यालयों SCA के मंच का इस्तेमाल छात्रों की समस्याओं को हल करने के लिए, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, युथ फेस्टिबल को करने के लिए किया। इसके इस्तेमाल से छात्रों में SFI का व्यापक प्रभाव बड़ा तथा विश्वविद्यालय में एस.एफ.आई. मजबूत हुई।
    प्रदेश विश्वविद्यालय से सम्बन्ध काॅलेजों के छात्रों की बहुत सारी समस्यायें विश्वविद्यालय से जुड़ी होती है जब छात्र अपनी समस्याओं को लेकर काॅलेजों से आते थे विश्वविद्यालय में SCA के पदाधिकारीयों ने उनकी मागों को हल किया जिससे काॅलेजों के अन्दर SFI का गठन करने में आसानी हुई। SFI  के चुने हुए विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के काॅलेज न जाने से संगठन बनाने में आसानी हुई। 1979 में काॅलेजों में प्रत्यक्ष चुनाव लड़ने के लिए विश्वविद्यालय व काॅलेजों में काफी व मजबूत आन्दोलन चलाया गया जिसकी वजह प्रदेश में प्रत्यक्ष चुनाव 1979 से काॅलेजों में भी होने लगे। चुनावों से SFI को छात्रों की जनवादी चेतना को बढ़ाने का मौका मिला तथा इनमें जीत हासिल करके काॅलजों में SCA के मंच को विश्वविद्यालय की तरह इस्तेमाल किया जिससे पुरे प्रदेश में SFI  छात्रों का लोकप्रिय संगठन बना।

  3. प्रदेश में SFI को छात्राओं का समर्थन क्यों प्राप्त हुआ: विश्वविद्यालय व काॅलेजों तथा दूसरे शिक्षा संस्थानों के जहां SFI के युनिट थे वहां पर SFI ने रैंगिग व लड़कियों को छेड़ने व उनको तंग करने वो के खिलाफ मुहिम छेड़ी तथा इसको पूरे प्रदेश में खत्म किया। लड़कियों को हर तरह का संरक्षण दिया। इसके साथ उनको संगठन में शामिल कर नेतृत्व में भी योजनावद् तरीके से आगे लाया छात्रों के साथ बराबरी में छात्राओं की शामिल किया गया जिसके कारण छात्राओं में जनवादी चेतना का विकास हुआ छात्राओं के प्रति पिछड़ी,सामंती व पूंजीवादी चेतना के खिलाफ भी छात्र छात्राओं को शिक्षित किया। इसके साथ SFI चुनावों में भी इनको प्रतिनिधित्व दिया जिसके कारण छात्राओं में SFI  काफी लोकप्रिय हुई ।

  4. छात्राओं के क्या-क्या मुद्दे उठाये: छात्राओं से सम्बन्धित तमाम मुद्दों को उठाया गया। शिक्षा, होस्टल, बस पास, खेल व सांस्कृतिक, छात्रों के प्रति गुडांगर्दी जैसे इत्यादि को प्राथमिकता पर उठाया। इसके साथ उनके व्यक्तित्व विकास के लिए भी अनेकों उठाया गया। छात्राओं से सम्बन्धित मुद्दों पर इनको शिक्षित करने के लिए लगातार शिक्षा का भी आयोजन किया गया।

  5. प्रदेश में विवि में 67प्रतिषत छात्राओं की मौजूदगी क्या प्रदेश में शिक्षा के विस्तार के कारण संभव हूई है अथवा इसमें वामपंथी आंदोलन का भी कोई योगदान है। हिमाचल प्रदेश केरल के बाद सबसे शिक्षित राज्य है। यहां पर शिक्षा का विस्तार काफी अच्छा हुआ है शिक्षा का ढांचा पूरक प्रदेश में अच्छा है और यह ढांचा सार्वजनिक क्षेत्र के तहत विकसीत हुआ है परन्तु अब शिक्षा का निजीकरण किया जा रहा है एक कारण यह भी लडकियोंकी शिक्षा का है परन्तु वामपंथी ओदोलन खासकर छात्र आन्दोलन ने प्रदेश में छात्राओं को ज्यादा उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए वातावरण तैयार किया विश्वविद्यालय में SFI का आंदालन मजबुत होने की वजह से छात्राओं को वियवविद्यालय में सुरक्षित माहौल मिलता है उन्हे किसी तरह की परेषानी नही होती है

  6. संगठन में छात्राओं को जोडने के लिए क्या सुझाव हैं :  छात्राओं की तमाम समस्याओं को उठाने की जरूरत है। इसके लिए उनको संगठन में शामिल किया जाना चाहिए । छात्राओं को योजनावद्व तरीके से नेतृत्व में लाया जाये संगठन से जुडी छात्राओं को सिर्फ मांग तक सरमित न रखकर उनको संगठन में जोडा जाये। उनकी शिक्षा का काम निरन्तर किया जाये कमेटियों में उनको शामिल किया जाना चाहिए। बैठकों का आयोजन छात्राओं की सुविधा के अनुसार किया जाना चाहिये। महिला असमानता के कारण के बारे में उन्हे शिक्षित किया जाये। इनकी रातनैतिक व वैचारिक शिक्षा समय पर होनी चाहिये छात्राओं को सभी गतिविधीयों में शामिल किया जाना जरुरी है संघर्षों में शामिल होकर ही इनकी चेतना बढ सकजी है।

 
 

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